किस प्रकार मुंगेर विसर्जन शोभा यात्रा एक काली रात में बदल गई?

किस प्रकार मुंगेर विसर्जन शोभा यात्रा एक काली रात में बदल गई?

मुंगेर की लगभग 500 साल पुरानी मान्यताओं के अनुसार दुर्गा पूजा के 10 वें दिन अर्थात विजय दशमी की शाम शक्ति की देवी शादीपुर, मुंगेर की बड़ी दुर्गा महारानी की भव्य विसर्जन शोभा यात्रा निकाली जाती है| दुनिया में बहुत कम परंपराओं हैं, जहां देवी देवता को विशेष रूप से निर्मित पालकी या कहार (लोगों के समूह या कंधे पर भक्तों के समूह द्वारा उठाया जाता है) पर ले जाया जाता है। यह शोभा यात्रा पूरी की रथयात्रा के सामान ही विश्व प्रचलित है| इस दौरान माता रानी को 32 कहारों तथा स्थानीय लोगो द्वारा कंधे पर उठा कर शहर का भ्रमण कराया जाता है|विजयदशमी के शाम से शुरू होने वाला यह शोभा यात्रा को सभी प्रतिष्ठानों को पूरा करते-करते लगभग 15 से 20 लग जाते है|अंततः अगले दिन माता का विसर्जन मुंगेर के सोझी घाट में कर दिया जाता है| इसी अनुष्ठान का पालन बड़ी दुर्गा माँ के परिवार के लिए भी किया जाता है जिसे छोटी दुर्गा, बडी काली और छोटी काली कहा जाता है और बड़ी माँ के तर्ज़ पर ही लगभग मुंगेर और जमालपुर की लगभग 100 मूर्तियों का विसर्जन करवाया जाता है| विसर्जन शोभायात्रा  की यह सैकड़ो वर्ष पुरानी परंपरा मुंगेर के दुर्गापूजा को एक अलग ही श्रेष्ठता प्रदान करती है|

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माता की विदाई 😥

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इस साल विसर्जन विजय दशमी के दिन ही किया जाना था

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 जो की दुर्गापूजा के ठीक बाद होना था के मद्देनजर मुंगेर प्रसाशन ने सभी पूजा समितियों को यह आदेश दिया की विसर्जन की सभी प्रक्रिया दशमी पूजा को ही कर लिया जाए| लेकिन मुंगेर प्रशासन के लिए यह समझ पाना मुश्किल था की इतने कम समय में सभी अनुष्ठानो को किस प्रकार पूरा किया जाए? हालांकि पूजा समितियों ने इस पर अपनी सहमति भी जताई|

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विसर्जन शोभायात्रा 2020

विजय दशमी के शाम से शुरू होने वाली शोभा यात्रा इस वर्ष मुंगेर पुलिस के आदेशानुसार दशमी के दिन पूर्वाहन 11:00 बजे से ही शुरू हो गई थी| सब कुछ अच्छा चल रहा था, दोपहर 2:00 बजे के करीब शोभायात्रा अम्बे चौक, शाम 4:00 के आस-पास कौड़ा-मैदान और शाम 6:00 के करीब बड़ी बाज़ार तक पहुँच चुकी थी|पूजा समितियों  से जितनी जल्दबाजी संभव थी वे कर ही रहे थे| संध्या 7:00 बजे आज़ाद चौक के निकट प्रेम-छायाकार के पास माँ की भव्य आरती संपन्न हुई|इस समय  तक सबकुछ सामान्य ही था| मुंगेर की सड़के सैकड़ो भक्तो से भरी थी, हर तरफ ढोल-बाजे के साथ-साथ भजन गूंज रहे थे या यों कहें की पूरा शहर विसर्जन शोभायात्रा के दौरान भक्तिमय हो चुका था|

आज़ाद चौक कर निकट माता की भव्य आरती

अचानक कहारों के द्वारा माता की मूर्ति उठाने में असमर्थता मालूम पड़ने लगी | शायद वे माता की मूर्ति को तेजी से लाने की वजह से थक चुके थे|कुछ लोगों ने तो यहाँ तक कह दिया की समय से पूर्व विसर्जन करने से माता को गुस्सा आ गया है इस लिए माता की मूर्ति नहीं उठ पा रही| 2-3 घंटे के निरंतर प्रयास किये जाने के बावजूद भी कहार और स्थानीय लोग माता की मूर्ति को उठाने में असफल हुए| मुंगेर प्रसाशन का एक दल जमालपुर की माता का विसर्जन जबरन दुसरे मार्ग से करवा रहे थे| ज्ञात हो की मुंगेर की यह वर्षो से परंपरा है की मुंगेर की बड़ी दुर्गा के विसर्जन के पश्चात ही अन्य सभी प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है|

घटना का मुख्य कारण

प्रशासन ने मुंगेर की अन्य सभी समितियों से बड़ी माता की मूर्ति से पूर्व ही विसर्जन का आदेश दिया, परन्तु पूजा समितियों ने इसपर अपनी असहमति जताई और कहा की हम बड़ी देवी की प्रतिमा से आगे नही चल सकते और न ही उनसे पहले मूर्ति का विसर्जन नही कर सकते| इस बात से पुलिस और पूजा समितियों में बहस हो गई जिस पर पुलिस ने  बेरहमी से लाठीचार्ज किया|

इस पर कुछ गुस्साए लोंगों ने पथराव किया और पुलिस ने जबावीकार्यवाही में लोगो पर अंधाधुंध गोली चलाई जिसमे एक अनुराग पोद्दार नामक 18 वर्षीय युवक कि मौके पर ही मृत्यु हो जाती है तथा 2 और लोगो की इलाज़ के दौरान मृत्यु जबकि 15-20 लोगो की जख्मी होने की भी खबर है| स्थिति यह थी की घायलों को अस्पताल तक ले जाने की कोई सुविधा नही थी|

मुंगेर प्रशासन के इस भयावह हमले से
सड़क खाली हो गया और पूरा शहर भक्तिमय वातावरण से कुछ ही मिनटों में संन्नाटे में बदल गया| आधी रात का समय था जब सडको पर कतारबद्ध प्रतिमाओं के पास एक भी व्यक्ति को प्रशासन ने नही रहने दिया| और इस तरह शोभायात्रा की रात मुंगेर की चुप्पी, मुंगेर की काली रात में तब्दील हो गई|

मुंगेर के लोगो के अब भी पूछ रहे

  • उस पीड़ित युवक की गलती क्या थी?
  • उस पीड़ित युवक की गलती क्या थी?
  • उस पीड़ित युवक की गलती क्या थी?

सम्पूर्ण घटना एक विडियो क्रम में

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