गाँधी की मुंगेरिया लाठी: जानिए क्यों  हैं प्रसिद्ध !

गाँधी की मुंगेरिया लाठी: जानिए क्यों हैं प्रसिद्ध !

मुंगेर शहर से लगभग 30 किमी की दुरी पर एक छोटा सा गावं घोरघट है| वैसे तो यह गाँव बहुत छोटा है परन्तु मुंगेर शहर में यह अपना एक अलग ही महत्त्व रखता है| यहाँ स्थित बेली ब्रिज जो अपने आप में मुंगेर जिले के लिए एक  महत्वपूर्ण स्थान रखता है| यहाँ की बांस की लकड़ी से बने सामान जैसे फर्नीचर, टोकड़ी, लाठी इत्यादि बहुत प्रसिद्द है|

1934 में आये भूकंप की एक मुंगेर की तस्वीर
1934 में आये भूकंप की एक मुंगेर की तस्वीर Pic source: munger.nic.in

बात 15 जनवरी 1934 की है जब दोपहर 2:30 के के आसपास बिहार और नेपाल एक भूकंप के झटके से दहल उठा| इस प्रलयंकारी भूकंप का केंद्रबिंदु बिहार के मुंगेर को ही माना गया है तब इस भूकंप की तीव्रता 8.1  मापी गई थी और शायद यह भारत के इतिहास की सबसे प्रलयंकारी भूकम्पों में से एक था| लोगो की माने तो इससे मुंगेर और मुजफ्फरपुर पूरी तरह से बर्बाद हो गया था|इस झटके से लगभग 11,000 लोगों ने अपनी जाने गवाई थी |इन्ही को श्रधांजली स्वरुप इस दिन को बिहार के लोग भूकंप दिवस के नाम से जानते है|

महात्मा गाँधी की मुंगेर की एक तस्वीर
महात्मा गाँधी की मुंगेर की एक तस्वीर

इस भीषण तबाही के बाद महात्मा गाँधी कलकत्ता से मुंगेर के लोगो की सहायता के लिए आये| जब अचानक से गाँधी जी की जहाज उनकी पत्नी कस्तूरबा के साथ घोरघट गंगा तट पर आकर रुकी तब उन्हें देखने लोगों की भीर उमड़ पड़ी| तब वहां के लोग अंग्रेजी हुकूमत के लिए बॉस की लाठियां बनाया करते थे| लोगो ने उनका तब भव्य स्वागत किया और बोधन पासवान, ब्रहमदेव पासवान के साथ मिलकर ग्रामीणों ने उन्हें भेट स्वरुप लाठी प्रदान किया परन्तु गाँधी जी ने इसे स्वीकार करने से नाराजगी जताई| गांधी जी ने ग्रामीणों से एक शर्त पर लाठी लेने को तैयार हुए की वे अब आगे से अंग्रेजो को लाठी नही बेचेंगे क्योंकि इन्ही लाठियों का प्रयोग वे भारतीयों पर किया करते थे|ग्रामीण उनके बात से सहमत हुए और वचनबद्ध हो गये और ऐसा माना जाता है की तभी से गान्धी जी की पहचान उनके लाठी से होने लगी|

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Pic source:gettyimages

गाँधी जी और बोधन पासवान के इस सम्बन्ध को आज भी ग्रामीण याद करते है| इस दिन को ग्रामीणों द्वारा 3 दिवसीय लाठी महोत्सव के नाम पर धूम-धाम से मानाने लगे| इतना ही नही गाँधी जी के घोरघट आगमन को यादगार बनाने हेतू 2014 में डाक विभाग ने बिहार के तत्कालीन राज्यपाल रामनाथ कोविंद के साथ मिलकर एक डाक टिकट भी जारी किया|  और वह गंगा तट जहाँ गाँधी जी कस्तूरबा के साथ आये थे वह पर गाँधी जी की प्रतिमा बनाई गई और गाँधी जयंती के दिन वहां  के लोग इसमें माल्यार्पण कर उस समय के परीदृश्य की कल्पना करते है|

By : Aman ( 👈Follow me on Instagram )

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