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जानिए क्यों प्रसिद्ध है मुंगेर की बड़ी दुर्गा माता की शोभायात्रा विसर्जन के दौरान


“ऐतिहासिक और पौराणिक रूप से शादीपुर की बड़ी दुर्गा महारानी और उनका परिवार विसर्जन के दौरान शोभा यात्रा नामक एक अनोखे अनुष्ठान के लिए मुंगेर में प्रसिद्ध है।”

आज दशहरा है , आज ही अधर्म पर धर्म की विजय, असत्य पर सत्य की विजय, बुराई पर अच्छाई की विजय पाप पर पुण्य की विजय,अत्याचार पर सदाचार की विजय, क्रोध पर दया, क्षमा की विजय अज्ञान पर ज्ञान की विजय, और रावण पर श्रीराम की विजय हुई थी ।

ऐतिहासिक और पौराणिक रूप से शादीपुर की बड़ी दुर्गा महारानी और उनका परिवार विसर्जन के दौरान शोभा यात्रा नामक एक अनोखे अनुष्ठान के लिए मुंगेर में प्रसिद्ध है। शोभा यात्रा दुनिया की उन बहुत कम परंपराओं में से एक है, जहाँ देवी देवता को विशेष रूप से बने पालकी या कहार पर उठाकर विसर्जन के लिए ले जाया जाता है । कुछ इस तरह ही एक प्रथा पुरी, ओडिशा में रथ यात्रा के त्योहार के नाम से विश्व प्रसिद्ध है।

प्रातः 4 बजे बाटा चौक परश्रद्धा समर्पण द्वारा माता की भव्य आरती के उपरांत


बड़ी माता और उनके परिवार ( छोटी दुर्गा और बड़ी काली ) के विसर्जन के दौरान शोभा यात्रा शहर के निर्धारित मार्ग से होते हुए गंगा घाट तक जाती है। शोभायात्रा विसर्जन का भव्य रूप होता है । यह शोभायात्रा विजयदशमी के शाम से ही शुरू हो जाती है। माता को कम से कम 32 कहारों की मदद से कहार पर उठाया जाता है ।



मुंगेर के लोगो का ऐसा कहना है की बड़ी दुर्गा माता का विसर्जन कभी भी किसी वाहन या रिक्शे की मदद से नहीं किया गया “लोगो का कहना है कि एक बार मुंगेर में कर्फ्यू लगने के बाद, प्रशासन ने एक ट्रक का उपयोग करके माता का विसर्जन करना चाहा लेकिन जब लोग मां की मूर्ति को उठाने के लिए गए, तो माँ टस से मस हुई फिर 32 कहारों को बुलाया गया और फ़िर माँ का विसर्जन हो पायामाता को कम से कम 32 कहारों की मदत से उठाया जाता है

बड़ी दुर्गा शोभा यात्रा के दौरान कस्तूरबा वाटर नजदीक

शोभा यात्रा के दौरान बहुत सारी रस्में निभाई जाती हैं। माता को स्वागत के लिए चौराहो पर रंगोलियां और दीप जलाये जाते है। शोभा यात्रा के दौरान श्रद्धालु रात भर यात्रा में शामिल होते हैं और पूरी यात्रा के दौरान देवी की पूजा होती है ।

बड़ी माता कैनरा बैंक चौक पर बेकापुर के दुर्गा नंबर 4 से मिलन

माँ की शोभा यात्रा संध्या 6 बजे मंदिर प्रांगन के मुख्यद्वार से निकलती है ,रात्रि 8 होते-होते शोभायात्रा अम्बे चौक आती है , फिर वहां से रात्रि 11 बजे कौड़ा मैदान,कौड़ा मैदान में मिलन के पश्चात 2 बजे तक पानी टंकी मोड़ (कस्तूरबा वाटर) पहुंचती है । बड़ी माता कैनरा बैंक चौक पर बेकापुर के दुर्गा नंबर 4 से मिलती हैं। प्रातः 4 बजे बाटा चौक पर श्रद्धा समर्पण द्वारा माता की भव्य आरती की जाती है। अम्बे चौक पर माँ की आरती और बाटा चौक पर महाआरती बहुत अद्भुत और भव्य होता है।


जय माँ दुर्गे के नारे से पूरा शहर गुंजायमान हो जाता है। मुंगेर की सड़को पर बस जय माँ दुर्गे, जय माँ दुर्गे! जय माँ दुर्गे! की गूंज सुनाई देती है। बड़ी महावीर मंदिर में माता की एक अंतिम आरती पूरे अनुष्ठानों के साथ होती है। इसके बाद मूर्ति सोझी घाट की ओर बढ़ती है। भगत सिंह चौक के बाद, बड़ी दुर्गा माता का मुख पूर्व की ओर कर दिया जाता है ।



विसर्जन शोभायात्रा समय सारिणी 2019

  • संध्या 6 बजे तक मंदिर प्रांगन के मुख्यद्वार पर
  • रात्रि 8 बजे अम्बे चौक
  • रात्रि 11 बजे कौड़ा मैदान
  • सुबहे 2 बजे पानी टंकी मोड़ (कस्तूरबा वाटर)
  • 2:30 सुबहे तक बड़ी बाज़ार
  • सुबहे 3 बजे तक लालकोठी
  • 3:30 तक प्रेम छायाकार
  • 4:30 सुबह तक बाटा चौक
  • 5:30 तक राजीव गाँधी चौक
  • सुबह 6:00 बजे तक गोयनका (1 नो. ट्राफिक)
  • प्रातः 8:00 तक टैक्सी स्टैंड,
  • 9:00 बजे महावीर स्थान में आरती ,
  • 10:00 बजे नगर निगम के पास,
  • सुबह 10:30 बजे प्रधान डाकघर के पास
  • प्रातः 11:00 तक भगत सिंह चौक
  • उसके उपरांत दोपहर 12:00 बजे भगत सिंह चौक से सोझी घाट के लिये प्रस्थान


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